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यह à¤à¤• परिणाम हो सकता है, गैसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤à¤‚टेराइटिस, जिसे पेट का फà¥à¤²à¥‚ à¤à¥€ कहा जाता है। यह माइकà¥à¤°à¥‹à¤¬à¤¿à¤¯à¤² संकà¥à¤°à¤®à¤£ के कारण पेट या आंत की सूजन के अलावा कà¥à¤› à¤à¥€ नहीं है। सामानà¥à¤¯ परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में, दसà¥à¤¤ केवल विशेष चिकितà¥à¤¸à¤¾ उपचार की आवशà¥à¤¯à¤•ता के बिना 2-4 दिनों तक रहता है। हालांकि, गंà¤à¥€à¤° दसà¥à¤¤ आपके जीवन के लिठखतरा हैं।
शिशॠके दसà¥à¤¤ का उपचार कैसे करना चाहिà¤?
सà¥à¤¨à¤¿à¤¶à¥à¤šà¤¿à¤¤ करें कि आपका शिशॠअधिक मातà¥à¤°à¤¾ में तरल पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ का सेवन करे, ताकि उसके लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ में सà¥à¤§à¤¾à¤° आठऔर शरीर में पानी की कमी (डिहाइडà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨) न हो।
अगर आपका शिशॠउचित मातà¥à¤°à¤¾ में सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ या फॉरà¥à¤®à¥‚ला दूध पी रहा है, तो ये जारी रखें। इसके साथ-साथ, थोड़े बड़े शिशà¥à¤“ं को बीच-बीच में पानी, ओरल रिहाइडà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ सोलà¥à¤¯à¥‚शन (ओआरà¤à¤¸) घोल के घूंट à¤à¥€ पिलाठजा सकते हैं। दसà¥à¤¤ के कारण शिशॠके शरीर से जो तरल और लवण निकल जाते हैं, ओआरà¤à¤¸ उनकी à¤à¤°à¤ªà¤¾à¤ˆ करने में मदद करता है। साथ ही, शिशॠजब à¤à¥€ उलà¥à¤Ÿà¥€ करे और पेशाब या मलतà¥à¤¯à¤¾à¤— करे तो उसे ओआरà¤à¤¸ के घोल की कà¥à¤› घूंट पिलाà¤à¤‚।
डॉकà¥à¤Ÿà¤° डायरिया की अवधि कम करने के लिठजिंक अनà¥à¤ªà¥‚रक लेने के लिठà¤à¥€ कह सकते हैं। आमतौर पर à¤à¤‚टिबायोटिकà¥à¤¸ उन बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को दी जाती है, जिनके मल में खून आ रहा हो।
शिशॠजो अतिरिकà¥à¤¤ तरल पदारà¥à¤¥ खो रहा है, उसकी पूरà¥à¤¤à¤¿ करने के लिठउसे अतिरिकà¥à¤¤ सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करवाà¤à¤‚। उसे फà¥à¤²-सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤‚थ फॉरà¥à¤®à¥‚ला दूध à¤à¥€ पिलाती रहें, यानि उसके दूध में निशà¥à¤šà¤¿à¤¤ मातà¥à¤°à¤¾ से अतिरिकà¥à¤¤ पानी मिलाकर उसे पतला न करें। फॉरà¥à¤®à¥‚ला दूध पीने वाले और ठोस आहार खाना शà¥à¤°à¥ कर चà¥à¤•े शिशà¥à¤“ं को उबालकर ठंडा किया पानी à¤à¥€ पिलाया जा सकता है।
ठोस आहार खाने वाले शिशà¥à¤“ं को नारियल पानी à¤à¥€ पिलाया जा सकता है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यह इलैकà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¥à¤¸ का à¤à¤°à¤ªà¥‚र सà¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤¤ है। शिशॠको फलों के रस, गà¥à¤²à¥‚कोस और सोडायà¥à¤•à¥à¤¤ पेय न दें। जो शकà¥à¤•र अवशोषित नहीं होती वह आंत में पानी इकटà¥à¤ ा करती है और दसà¥à¤¤ को बढ़ा सकती है।
शिशॠको à¤à¤‚टि-डायरिया दवा न दें। 12 साल से कम उमà¥à¤° के शिशà¥à¤“ं को यह दवा नहीं देनी चाहिà¤, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इसके गंà¤à¥€à¤° साइड इफेकà¥à¤Ÿ हो सकते हैं। यदि आप इसे लेकर चिंतित हों, या आपके मन में कोई सवाल हो तो हमेशा अपनी डॉकà¥à¤Ÿà¤° से बात करें।
साथ ही, आपके शिशॠकी वजह से दूसरे बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में à¤à¥€ डायरिया फैल सकता है। इसलिठजब उसने आखिरी बार पतला मलतà¥à¤¯à¤¾à¤— किया हो उसके कम से कम 48 घंटों बाद तक ​उसे डेकेयर या कà¥à¤°à¥‡à¤¶ न à¤à¥‡à¤œà¥‡à¤‚। इसके बाद दो हफà¥à¤¤à¥‹à¤‚ तक शिशॠको सà¥à¤µà¤¿à¤®à¤¿à¤‚ग के लिठन ले जाà¤à¤‚।
कà¥à¤¯à¤¾ सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करने वाले शिशà¥à¤“ं में दसà¥à¤¤ होने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ कम होती है?
हां। सà¥à¤¤à¤¨à¤¦à¥‚ध में मौजूद विशेष ततà¥à¤µ और à¤à¤‚टिबॉडीज डायरिया पैदा करने वाले जीवों को बढ़ने से रोक सकते हैं। साथ ही, सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करने वाले शिशॠपीने के पानी, दूध की बोतलों या सही तरीके से या साफ-सफाई से तैयार न किठगठफॉरà¥à¤®à¥‚ला दूध की वजह से होने वाले इनफेकà¥à¤¶à¤¨ के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ होते हैं।
कà¥à¤¯à¤¾ शिशॠको ठोस आहार खिलाना बंद कर देना चाहिà¤?
नहीं। à¤à¤• सामानà¥à¤¯ सेहतमंद आहार शिशॠके दसà¥à¤¤ के दौर की अवधि घटाने में मदद कर सकता है। à¤à¤¸à¤¾ इसलिठकà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ à¤à¥‹à¤œà¤¨ से शरीर को जरà¥à¤°à¥€ पोषक ततà¥à¤µ मिलते हैं, जो इनफेकà¥à¤¶à¤¨ से लड़ने के लिठजरà¥à¤°à¥€ हैं।
यदि आपके शिशॠकी उमà¥à¤° छह महीने या इससे अधिक है और वह बार-बार उलà¥à¤Ÿà¥€ नहीं कर रहा, तो आप उसे ठोस आहार खिलाना जारी रख सकती हैं।
यदि शिशॠने हाल ही में ठोस आहार खाना शà¥à¤°à¥ किया है तो आप उसे चावल, मूंग दाल की खिचड़ी, केले, सेब की पà¥à¤¯à¥‚री और सूखे टोसà¥à¤Ÿ खिला सकती हैं।
थोड़े बड़े शिशॠया बचà¥à¤šà¥‡ को आप थोड़ी मातà¥à¤°à¤¾ में चिकन या सà¥à¤Ÿà¤¾à¤°à¥à¤šà¤¯à¥à¤•à¥à¤¤ à¤à¥‹à¤œà¤¨ जैसे कि मसले हà¥à¤ आलू और पासà¥à¤¤à¤¾ दे सकती हैं।
हालांकि, हो सकता है आपके बचà¥à¤šà¥‡ की जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ खाने की इचà¥à¤›à¤¾ न हो। उसे थोड़ी-थोड़ी मातà¥à¤°à¤¾ में समय-समय पर खाना खिलाने से फायदा हो सकता है। उसके à¤à¥‹à¤œà¤¨ में आप ​थोड़ा तेल, घी या मकà¥à¤–न मिलाकर इसे और अधिक कैलोरी समृदà¥à¤§ बना सकती है।
इस बात के कà¥à¤› पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£ हैं कि दही में पाठजाने वाले जीवित बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤² कलà¥à¤šà¤° दसà¥à¤¤ की मातà¥à¤°à¤¾ और अवधि को कम करने का सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ और पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥€ तरीका है। यदि आपका शिशॠपहले से ही ठोस आहार खा रहा है, तो सादा, बिना मीठे का फà¥à¤² कà¥à¤°à¥€à¤® दूध से बना दही उसे दे सकती हैं। यह डायरिया के उपचार का आसान तरीका है, खासकर यदि शिशॠको इसका सà¥à¤µà¤¾à¤¦ पसंद आता है तो। आप शिशॠको लसà¥à¤¸à¥€ या छाछ à¤à¥€ दे सकती हैं। बस आप यह सà¥à¤¨à¤¿à¤¶à¥à¤šà¤¿à¤¤ करें कि दही में लकà¥à¤Ÿà¥‹à¤¬à¥‡à¤¸à¤¿à¤²à¤¸ या जीवित कलà¥à¤šà¤° हो।
कà¥à¤› डॉकà¥à¤Ÿà¤° शिशॠको पà¥à¤°à¥‹à¤¬à¤¾à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• अनà¥à¤ªà¥‚रक देने की à¤à¥€ सलाह देते हैं। इस बारे में अपने डॉकà¥à¤Ÿà¤° से अधिक जानकारी लें। वे बता सकेंगे कि आपके शिशॠके लिठकौन सा अनà¥à¤ªà¥‚रक सही रहेगा और कितने समय त​क शिशॠको यह देने की जरà¥à¤°à¤¤ है। मगर यदि शिशॠखाना न चाहे, तो à¤à¥€ फिकà¥à¤° न करें। जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ जरà¥à¤°à¥€ यह है कि वह परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ मातà¥à¤°à¤¾ में तरल पदारà¥à¤¥ लेता रहे, ताकि उसके शरीर में पानी की कमी न हो।
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